देश की खबरें | दिल्ली दंगे: अदालत ने तीन आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए

नयी दिल्ली, 18 नवंबर दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के दो दंगों के मामलों में तीन आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश देते हुए, दोनों मामलों में कुल 19 अतिरिक्त शिकायतों को अभियोजित करने संबंधी पुलिस के रुख को ‘भ्रामक’ करार दिया।
अदालत ने आरोपियों के खिलाफ विभिन्न आरोप तय किये हैं जिनमें दंगा, आगजनी और घर में अवैध रूप से प्रवेश करना शामिल हैं। अदालत ने कहा कि अतिरिक्त शिकायतों की पूर्ण जांच नहीं की गई और जांच अधिकारी (आईओ) ने शिकायतों को आपस में जोड़ने के लिए सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा किया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रामचला, आरोपी जावेद, गुलफाम और मुस्तकीम के खिलाफ दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई कर रहे थे। इन लोगों पर एक दंगाई भीड़ का हिस्सा होने का आरोप है जो 25 फरवरी 2020 को दयालपुर पुलिस थाना क्षेत्र में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाओं में शामिल रही थी।
शुरूआत में, 17 शिकायतों और 22 शिकायतों को क्रमश: पहले और दूसरे मामलों में मुख्य प्राथमिकी से जोड़ दिया गया था, लेकिन दोनों मामलों में तीसरा पूरक आरोपपत्र दाखिल करते समय पुलिस ने दो अर्जियां दायर की थीं। इनके जरिये शिकायतों को लौटाने का अनुरोध करते हुए कहा गया था कि उनकी अलग-अलग जांच की जाएगी। अदालत ने अगस्त में दोनों अर्जियां स्वीकार कर ली थीं।
अंतिम पूरक आरोपपत्र दाखिल करते हुए जांच अधिकारी ने अदालत को सूचित किया कि पहले मामले में 11 अलग शिकायतों को अभियोजित किया जाएगा और दूसरे मामले में आठ अतिरिक्त शिकायतों के संबंध में अभियोजित किया जाएगा।
इस तरह, दोनों मुख्य प्राथमिकियों में कुल 19 शिकायतें जोड़ी गईं हैं।
दोनों मामलों में एक साझा आदेश जारी करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रामचला ने कहा, ‘‘मैंने पाया कि रिकार्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि जो संबंधित अतिरिक्त शिकायतों में संबद्ध स्थानों पर हुई घटनाओं के समय और तारीख की पुष्टि करता हो।’’
न्यायाधीश ने संबद्ध थाना प्रभारी को आगे की जांच अलग से करने के लिए अतिरिक्त शिकायतें लेने को कहा।
अदालत ने दो मुख्य शिकायतकर्ताओं आफताब और जमीर अहमद के बयानों के आधार पर यह साबित हुआ है कि उनकी दुकानों में दंगाई भीड़ ने तोड़फोड़ की थी, जिसमें तीनों आरोपी शामिल थे।
अदालत ने तीनों आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *